Wed, 21 Sep 2022

इंजीनियर बनने के लिए इस क्रिकेटर ने छोड़ दिया था टीम इंडिया का साथ, लेकिन बनकर लौटा जादुई स्पिनर और मचाया धमाल

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जब भारतीय क्रिकेट टीम में अच्छे स्पिनरों की बात की जाती है, तो उनमें 60-70 के दशक की स्पिन चौकड़ी की बात जरूर होती है. उस समय भारतीय टीम में बेहतरीन स्पिनर खिलाड़ी थे. जिन्होंने विश्व क्रिकेट में खूब धमाल मचाया. आज हम आपको टीम इंडिया के उस गेंदबाज के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने इंजीनियर बनने के लिए 5 सालों तक क्रिकेट नहीं खेला था. लेकिन इस गेंदबाज ने जब क्रिकेट में वापसी की तो धमाल मचा दिया.

हम बात कर रहे हैं दाएं हाथ के ऑफिस स्पिनर गेंदबाज इरापल्ली प्रसन्ना की. प्रसन्ना बहुत ही जबरदस्त गेंदबाज थे. वो जितने अच्छे गेंदबाज थे उतने अच्छे छात्र और बेटे भी थे. क्रिकेट करियर शुरू होने के बाद प्रसन्ना ने पढ़ाई भी की और क्रिकेट से ब्रेक भी लिया. 1962 में प्रसन्ना ने भारत के लिए डेब्यू टेस्ट मैच खेला था. उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मद्रास में एक टेस्ट मैच खेला था जिसमें उन्हें केवल एक ही विकेट हासिल हुआ था. लेकिन उन्होंने अपनी गेंदबाजी से बीसीसीआई के अधिकारियों को काफी प्रभावित किया था. जिस कारण उन्हें वेस्टइंडीज दौरे के लिए भी चुना गया.

उनके बढ़ते क्रिकेट करियर में उनके पिता की नाराजगी रुकावट का कारण बनी. प्रसन्ना के पिता क्रिकेट के लिए उनकी पढ़ाई छोड़ने को लेकर नाराज थे. उन्होने वो टीम में जाने की इजाजत नहीं देना चाहते थे. लेकिन बीसीसीआई सचिव एन चिन्नास्वामी ने मैसूर के महाराज की सहायता से प्रसन्ना के पिता को मनाने में सफलता हासिल की. प्रसन्ना के पिता ने उनके सामने शर्त रखी, कि उन्हें वेस्टइंडीज से वापस लौटकर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करनी होगी.

प्रसन्ना के पिता की शर्त स्वीकार करने के बाद वो वेस्टइंडीज दौरे पर गए. इस दौरे पर प्रसन्ना को केवल एक टेस्ट में से खेलने को मिला. लेकिन जब प्रसन्ना वेस्टइंडीज दौरे से वापस लौटे तो उनके पिता का निधन हो गया. ऐसे में प्रसन्ना के लिए पिता से किया हुआ वादा निभाना और भी जरूरी हो गया. उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की और वह 5 सालों तक क्रिकेट से दूर रहे. 

कोर्स पूरा होने के बाद प्रसन्ना ₹300 प्रति माह के वेतन पर आईटीआई में नौकरी करने लगे. 1967 में प्रसन्ना की एक बार फिर से क्रिकेट में वापसी हुई. उन्होंने वेस्टइंडीज के विरुद्ध टेस्ट में 5 विकेट झटके और वो इसके बाद भारतीय स्पिन गेंदबाजी की चौकड़ी बन गए. उन्होंने टीम इंडिया को कई मैच जिताऊ स्पेल कराए और भारतीय टीम की जान बन गए.

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